why in the world is not honest? दुनिया में ईमानदारी क्योँ नहीं है?


दुनिया में ईमानदारी क्योँ नहीं है?

दुनिया में ईमानदारी क्योँ नहीं है?">why in the world is not honest?


जब तक चपरासी अपमानित है और राष्ट्रपति सम्मानित है तब तक दुनिया में ईमानदारी नहीं हो सकती क्योंकि चपरासी कैसे बैठा रहे चपरासी की जगह पर, और जिंदगी इतनी बड़ी नहीं है कि सत्य का सहारा लिए बैठा रहे। और जब असत्य सफलता लाता हो तो कौन पागल होगा उसे छोड़ दे! और केवल आप मानते हैं बल्कि मामला कुछ ऐसा है कि आपने जिस भगवान को बनाया हुआ है, जिस स्वर्ग को, वह भी इन सफल लोगों को मानता है। चपरासी मरता है तो नरक ही जाने की संभावना है। राष्ट्रपति कभी नरक नहीं जाते, वे सीधे स्वर्ग चले जाते हैं। वहां भी सिक्के यही लगा कर रखे हुए हैं, वहां भी जो सफल है वही!-तो फिर क्या होगा?

सफलता का केंद्र खत्म करना होगा। अगर बच्चों से आपको प्रेम है और मनुष्य-जाति के लिए आप कुछ करना चाहते हैं तो बच्चों के लिए सफलता के केंद्र को हटाइए, सुफलता के केंद्र को पैदा करिए। अगर मनुष्य-जाति के लिए कोई भी आपके हृदय में प्रेम है और आप सच में चाहते हैं कि एक नई दुनिया, एक नई संस्कृति और नया आदमी पैदा हो जाए तो यह सारी पुरानी बेवकूफी छोड़नी पड़ेगी, जलानी पड़ेगी, नष्ट करनी पड़ेगी और विचार करना पड़ेगा कि क्या विद्रोह हो, कैसे हो सकता है इसके भीतर से। यह सब गलत है इसलिए गलत आदमी पैदा होता है।

शिक्षक बुनियादी रूप से इस जगत में सबसे बड़ा विद्रोही व्यक्ति होना चाहिए। तो वह, तो वह पीढ़ियों को आगे ले जाएगा। और शिक्षक सबसे बड़ा दकियानूस है, सबसे बड़ा ट्रेडिशनलिस्ट वही है, वही दोहराए जाता है पुराने कचरे को। क्राँति शिक्षक में होती नहीं है। आपने कोई सुना है कि शिक्षक कोई क्राँतिपूर्ण हो। शिक्षक सबसे ज्यादा दकियानूस, सबसे ज्यादा आर्थाडाक्स है, और इसलिए शिक्षक सबसे खतरनाक है। समाज उससे हित नहीं पाता, अहित पाता है। शिक्षक को होना चाहिए विद्रोही-कौन सा विद्रोह है? मकान में आग लगा दें आप, या कुछ और कर दें या जाकर ट्रेनें उलट दें या बसों में आग लगा दें। उसको नहीं कह रहा हूं, कोई गलती से वैसा समझ ले। मैं यह कह रहा हूं कि हमारे जो मूल्य हैं, हमारी जो वैल्यूज हैं-उनके बाबत विद्रोह का रुख, विचार का रुख होना चाहिए कि हम विचार करें कि यह मामला क्या है!

जब आप एक बच्चे को कहते हैं कि तुम गधे हो, तुम नासमझ हो, तुम बुद्धिहीन हो, देखो उस दूसरे को, वह कितना आगे है! तब आप विचार करें, तब आप विचार करें कि यह कितने दूर तक ठीक है और कितने दूर तक सच है! क्या दुनिया में दो आदमी एक जैसे हो सकते हैं? क्या यह संभव है कि जिसको आप गधा कह रहे हैं कि वैसा हो जाए जैसा कि जो आगे खड़ा है। क्या यह आज तक संभव हुआ है? हर आदमी जैसा है, अपने जैसा है, दूसरे आदमी से कंपेरिजन का कोई सवाल ही नहीं। किसी दूसरे आदमी से उसकी कोई कंपेरिजन नहीं, कोई तुलना नहीं है।

एक छोटा कंकड़ है, वह छोटा कंकड़ है; एक बड़ा कंकड़ है वह बड़ा कंकड़ है! एक छोटा पौधा है, वह छोटा है; एक बड़ा पौधा है, वह बड़ा पौधा है! एक घास का फूल है, वह घास का फूल है; एक गुलाब का फूल है, वह गुलाब का फूल है! प्रकृति का जहां तक संबंध है, घास के फूल पर प्रकृति नाराज नहीं है और गुलाब के फूल पर प्रसन्न नहीं है। घास के फूल को भी प्राण देती है उतनी ही खुशी से जितने गुलाब के फूल को देती है। और मनुष्य को हटा दें तो घास के फूल और गुलाब के फूल में कौन छोटा है, कौन बड़ा है-है कोई छोटा और बड़ा! घास का तिनका और बड़ा भारी चीड़ का दरख्त...तो यह महान है और यह घास का तिनका छोटा है? तो परमात्मा कभी का घास के तिनके को समाप्त कर देता, चीड़-चीड़ के दर" रह जाते दुनिया में। नहीं, लेकिन आदमी की वैल्यूज गलत हैं।

यह आप स्मरण रखें कि इस संबंध में मैं आपसे कुछ गहरी बात कहने का विचार रखता हूं। वह यह कि जब तक दुनिया में हम एक आदमी को दूसरे आदमी से कम्पेयर करेंगे, तुलना करेंगे तब तक हम एक गलत रास्ते पर चले जाएंगे। वह गलत रास्ता यह होगा कि हम हर आदमी में दूसरे आदमी जैसा बनने की इच्छा पैदा करते हैं; जब कि कोई आदमी किसी दूसरे जैसा बना है और बन सकता है।

राम को मरे कितने दिन हो गए, या क्राइस्ट को मरे कितने दिन हो गए? दूसरा क्राइस्ट क्यों नहीं बन पाता और हजारों-हजारों क्रिश्चिएन कोशिश में तो चौबीस घंटे लगे हैं कि क्राइस्ट बन जाएं। और हजारों हिंदु राम बनने की कोशिश में हैं, हजारों जैन, बुद्ध, महावीर बनने की कोशिश में लगे हैं, बनते क्यों नहीं एकाध? एकाध दूसरा क्राइस्ट और दुसरा महावीर पैदा क्यों नहीं होता? क्या इससे आंख नहीं खुल सकती आपकी? मैं रामलीला के रामों की बात नहीं कह रहा हूं, जो रामलीला में बनते हैं राम। आप समझ लें कि उनकी चर्चा कर रहा हूं, कई लोग राम बन जाते हैं। वैसे तो कई लोग बन जाते हैं, कई लोग बुद्ध जैसे कपड़े लपेट लेते हैं और बुद्ध बन जाते हैं। कोई महावीर जैसा कपड़ा लपेट लेता है या नंगा हो जाता है और महावीर बन जाता है। उनकी बात नहीं कर रहा। वे सब रामलीला के राम हैं, उनको छोड़ दें। लेकिन राम कोई दूसरा पैदा होता है?

यह आपको जिंदगी में भी पता चलता है कि ठीक एक आदमी जैसा दूसरा आदमी कहीं हो सकता है? एक कंकड़ जैसा दूसरा कंकड़ भी पूरी पृथ्वी पर खोजना कठिन है, एक जड़ कंकड़ जैसा-यहां हर चीज यूनिक है, हर चीज अद्वितीय है। और जब तक हम प्रत्येक की अद्वितीय प्रतिभा को सम्मान नहीं देंगे तब तक दुनिया में प्रतियोगिता रहेगी, प्रतिस्पर्धा रहेगी, तब तक दुनिया में मार-काट रहेगी, तब तक दुनिया में हिंसा रहेगी, तब तक दुनिया में सब बेईमानी के उपाय करके आदमी आगे होना चाहेगा, दूसरे जैसा होना चाहेगा।


Why honesty in the world is not? "> Why in the world is not honest?

Until then honored by peons humiliated and President can not be honest in the world how to sit as a peon peon's place, and life is not so big to sit for the support of the truth. And when you lie, then who will bring success to be mad to leave him! And not only that you have something you believe, but the matter which God has created, the heavens, he considers these successful people. Peon is likely to die as hell. No President ever go to hell, they go straight to heaven. By keeping the same coin is there too, there is a successful one! - What will happen then?

Success center to end. If you love children and men - to race you want to do something for children's success Remove center, the center created Suflta up. If man - race of any love in your heart and you really want a new world, a new culture and new man is born, it will lose all the old nonsense, will Jlani, will have to destroy and to consider What do I have to revolt, how can it from within. It's all wrong because the wrong person is born.

Teachers basically be the world largest rebel person. So that, it will take generations ahead. Dkianus and teachers is greatest, largest Tredisnlist same, same old garbage is repeated. Teachers are not in revolution. You have heard that some teachers are no क्राँतिपूर्ण. Teachers most Dkianus, most Arthadaks, and so the teacher is the most dangerous. Society does not interest him, does harm. Rebel teacher should be - what is rebellion? You put in a house fire, or put something else or go and set fire to buses or trains to reverse. I am not saying it, like a mistake not to understand. I am saying that our values, our who are Valug - his rebellious attitude matter, the approach should be considered that this matter is that we consider!

When a child asks you if you fool, you foolish, foolish you are, look the other, how far it is! Then you might consider, when you consider that so far is fine and so far it's true! What in the world can two men are the same? Is it possible that you who are saying that what happens as a donkey who is standing in front. It has been possible to date? Every man is like, its like, no question of another man Kanperijn. No its not Kanperijn another man, is no comparison.

A small pebbles, it is small pebbles, is a large pebble is a pebble! A small plant, it is small, one big plant, it is a big tree! The flower of a grass, it is the flower of grass, a rose, he rose flower! As far as nature is concerned, the nature of grass flowers and roses to antagonize is happy. Grass flower also makes life much as happily gives to roses. And men remove the flowers and roses in the grass who is young, who is bigger - is a small and big! Grass straw and great ... it is great and it Ceedh Drkht the grass is short straw? So God put an end to ever give the grass leaf, Ceedh - Ceedh the rate "W remain in the world. No, but man Valug are wrong.

You remember in this connection that I carry with you the idea of saying something profound statement. That unless a man in the world we will Kmpeyr another man, might compare a wrong path then we will go on. Every man in the wrong way that we create another man aspiring to be like, when a man like any other, nor can be made up.

Ram How long have died, or how many days that Christ died for? Why does not become another Christ, and thousands - in thousands Krishcian clock are trying to become the Christ. And thousands are trying to become Hindu Ram, thousands Jain, Buddha, Mahavira are trying to be, why not become a couple? Why not create another Christ and another couple of Mahavira? What it can not open your eyes? I am not saying about Ramon Ram Lila, which are made in Ramlila Ram. You do not understand is that his discussion, many people become Rama. Although many people become, many people take the Buddha and Buddha as they become wrapped in cloth. As a cloth wrapped takes Mahavira Mahavira and becomes or is naked. His is not talking. They are Ram Ram Lila, leave them. But Rama is born a second?

It also shows you the right to life as a man than another man could be? Like a pebble is difficult to find another pebble on the whole Earth, a root like pebbles - There is Everything Unique, Everything is unique. And while we respect everyone's unique talents will not be until the world championship, will compete, the world killed in - will be cut, the world will be violence, then everyone in the world by way of cheating men precede want, others would be like.

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