Will also remember your Oldness.
जब तू छोटा था तब माँ की शय्या गीली करता था,
अब बडा हुआ तो माँ की आँखे गीली करता है ।
माँ–बाप की आँखो में दो बार आँसू आते है,
लड्की घर छोडे तब, लड्का मुँह मोडे तब ।
जिस मुन्ने को माँ–बाप ने बोलना सिखाया था,
वह मुन्ना बडा होकर माँ–बाप को मौन रहना सिखाता है ।
‘पत्नी’ पसंद से मिलती है लेकिन ‘माँ’ पुण्य से मिलती है
पसंद से मिलने वाली के लिए पुण्य से मिलने वाली को मत ठुकराना ।
जिन बेटो के जन्म पर माँ–बाप ने पेडे बाँटे,
वही बेटे जवान होकर माँ–बाप को बाँटे ।
बचपन के आठ साल तुझे अंगुली पकडकर
जो माँ–बाप स्कुल ले जाते थे, उन माँ–बाप को
बूढापे के आठ साल सहारा बनकर मंदिर ले जाना
शायद थोडा सा तेरा कर्ज, थोडा सा तेरा फर्ज पूरा होगा ।
एक किलो वजन, एक घण्टा उठाने मे तेरा हाथ दुख जाता है,
माँ को सताने से पहिले इतना तो सोच, तुझे नौ महिने पेट मे कैसे उठाया होगा ।
बचपन मे गोद देने वाली को, बुढापे मे दगा मत देना,
यदि बुढापे मे दगा देगा तो, याद रखना बुढापा तेरा भी आएगा ।
पेट मे पाँच बेटे, जिसको भारी नहीं लगे थे,
वो माँ पाँच घरों में भारी लग रही है,
तो फिर लोग कैसे कहेंगे यह श्रवण कुमार का देश है ।
—माँ भगवती
अब बडा हुआ तो माँ की आँखे गीली करता है ।
माँ–बाप की आँखो में दो बार आँसू आते है,
लड्की घर छोडे तब, लड्का मुँह मोडे तब ।
जिस मुन्ने को माँ–बाप ने बोलना सिखाया था,
वह मुन्ना बडा होकर माँ–बाप को मौन रहना सिखाता है ।
‘पत्नी’ पसंद से मिलती है लेकिन ‘माँ’ पुण्य से मिलती है
पसंद से मिलने वाली के लिए पुण्य से मिलने वाली को मत ठुकराना ।
जिन बेटो के जन्म पर माँ–बाप ने पेडे बाँटे,
वही बेटे जवान होकर माँ–बाप को बाँटे ।
बचपन के आठ साल तुझे अंगुली पकडकर
जो माँ–बाप स्कुल ले जाते थे, उन माँ–बाप को
बूढापे के आठ साल सहारा बनकर मंदिर ले जाना
शायद थोडा सा तेरा कर्ज, थोडा सा तेरा फर्ज पूरा होगा ।
एक किलो वजन, एक घण्टा उठाने मे तेरा हाथ दुख जाता है,
माँ को सताने से पहिले इतना तो सोच, तुझे नौ महिने पेट मे कैसे उठाया होगा ।
बचपन मे गोद देने वाली को, बुढापे मे दगा मत देना,
यदि बुढापे मे दगा देगा तो, याद रखना बुढापा तेरा भी आएगा ।
पेट मे पाँच बेटे, जिसको भारी नहीं लगे थे,
वो माँ पाँच घरों में भारी लग रही है,
तो फिर लोग कैसे कहेंगे यह श्रवण कुमार का देश है ।
—माँ भगवती
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