is silent still living

कमजोर वजीरे-आजम गुप चुप गुप चुप रहते है...
जब बात वतन की आती है फिर भी मोंन रहते है...

नहीं दिखती इन्हें सरहदे और हमारे पहरेदार ...
जो वतन की खातिर है मर मिटने को तयार ..

ऐ सी कमरों मैं बैठ के बड़ी योजना बनाते है...
गरीबो का पेट काट के.. ३२ रुपये दे जाते है....

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