The testimony by itself, evidence of the good:

25 मार्च 2012 को जंतर मंतर, नई दिल्ली पहुंचें और
खुद के लिए गवाही देकर, अपने होने का साक्ष्य पेश करो :

हर बात के प्रत्यक्ष दर्शी हो तुम सारे
फिर भी न जाने क्यों अप्रत्यक्ष भाव में जिए जा रहे हो तुम
जरुरत तो तुम्हारी जहाज की है
फिर भी समंदर का सफ़र नाव में किये जा रहे हो तुम
जब से मिला है "आम आदमी" का तमगा
बस उस शब्द के स्वभाव में जिंदगी जिए जा रहे हो तुम

अगर प्रत्यक्ष दर्शी हो तो गवाह बनो
समंदर पार होना है तो जहाज बनो
अगर आदमी हो तो आम नहीं, खास बनो
कब तक साक्षी रहोगे, अब तो साक्ष्य बनो

SHOW UNITY
Poem by: SOMESH KHARE
India is changing.. Be a part

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