Indian rupee plummets to historic low against dollar???
मेरा भारत महान
Indian rupee plummets to historic low against dollar
मित्रों दुखखबरी , 1 डॉलर की कीमत आज भारत के 55 रूपये 39 पैसे के बराबर हो गयी है ???????
वैसे भ्रष्ट कांग्रेस के राज में ये कोई बड़ी बात नहीं है , भारत के तथाकथित 65 साल की आज़ादी में ऐसा तो होना ही था , राजीव भाई बताते थे की ये सब भारत के अन्तर्राष्ट्रीय संधियों के मकडजाल में जकड़े हुए होने के कारण हो रहा है और अगर उन संधियों को ख़तम नहीं किया गया तो ऐसा ही होता रहेगा ...
27 दिसम्बर 1947 में भारत के कुछ गद्दारों काले अंग्रेजों ने गोरे अंग्रेजों के साथ संधियाँ की थी
1. विश्व बैंक की संधि
और
दूसरी 2. अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की संधि उस समय भारत को मिलाकर लगभग 44 देश इस संधि में अपना अंशदान देते थे और फँसे हुए थे
भारत की तथाकथित आज़ादी साल 1947 से 1952 तक भारत के रूपये की कीमत 1 डॉलर के समान थी 1 रूपये = 1 डॉलर थी
संधि कुछ इस प्रकार थी की भारत हर साल अपना अंशदान अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक में जमा कराएगा वो अंशदान 1 अरब डॉलर से 2 अरब डॉलर और 1 अरब का मतलब 100 करोड़ रूपये होता है , पर जब कभी कर्जे की जरुरत पड़ेगी तब दोनों हमारे ऊपर कुछ शर्तें लादते हैं उन शर्तों के तहत (पर) ही हमें कर्ज दिया जायेगा / जाता है ...
भारत अपना अंशदान हर साल जमा कराता आ रहा है और वो उनकी सम्पत्ति है न की भारत की ? भारत ने हर साल अपना अंशदान जमा कराया पहली बार 1947 में फिर 1948 में जमा कराया फिर 1949 में जमा कराया फिर 1950 में जमा कराया फिर 1951 में जमा कार्य फिर 1952 में ही जमा कराया और 1952 में ही हमारी सरकार को कर्जे की जरुरत पड़ गयी , उस समय हमारी सरकार ने पहली पंचवार्षिक योजना बनायीं जिसके लिए पूँजी की जरुरत पड़ गयी थी तो हमारी सरकार ने विश्व बैंक से कहा की हम 1947 से हर साल अपना अंशदान जमा करा रहे हैं , और अबतक हमारा आप के पास जमा अंशदान करीब 6 से 7 अरब डॉलर का हो चुका है !
लिहाजा हम इतना कर्ज लेने के अधिकारी हैं हमें कर्ज दिया जाये , तो विश्व बेंक ने कहा की हम कर्ज तो देंगें , लेकिन हमारी शर्तें मान लो आप तब हम आप को कर्ज देंगें तो वो कर्ज तो देते हैं पर शर्तें (Condition ) लगते हैं !
1952 में पहली बार अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने सबसे पहली शर्त लगायी की भारत अपने रूपये की कीमत गिराएगा , अवमूल्यन (Devaluation ) करेगा और 1952 से पहले की स्तिथि ये थी की भारत का 1 रुपया 1 डॉलर के बराबर था ! लेकिन विश्व बैंक के पास जब हम कर्ज माँगने गए तो उन्होंने शर्त रखी की अपने रूपये की कीमत गिराओ और उसने पहली ही बारी में भारत के रूपये की कीमत डॉलर के मुकाबले 30% गिरा दी फिर क्या हुआ 1957 में फिर हम विश्व बैंक और मुद्रा कोष के पास कर्ज माँगने के लिए क्योंकि दूसरी पंचवार्षिक योजना के लिए पैसे(रूपये) की कीमत गिराओ फिर 1962 में गए फिर 1967 में गए फिर 1972 में गए फिर 1977 में गए फिर 1982 में गए फिर 1987 में गए और 1991 में तो विश्व बैंक और मुद्रा कोष ने कह दिया की इतने %प्रतिशत कीमत गिराओगे तभी हम कर्ज देंगें , भारत सरकार ने विश्व बैंक और मुद्रा कोष के कहने पर इतनी कीमत गिराई रूपये की कीमत 1952 में 1 रूपये = 1 डॉलर से ले कर आज 2012 में 1 डॉलर की कीमत 55 .39 रूपये हो गई है !
और अब आप ही सोचिये सरकार ने विश्व बैंक और अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के षड्यंत्र में फँस कर अपने रूपये की कीमत 55 रूपये 39 पैसे अपनी करेंसी की कम करा ली ...
हमने 55 गुणा कीमत अपनी प्रोपर्टी की कम कर ली ...
हमने 55 गुणा कीमतें अपने संसाधनों की कम कर ली ...
हमने 55 गुणा अपनी इज्जत कम कर ली और अमरीका का डॉलर 55 गुणा ज्यादा कर दिया !
अमरीका की सम्पत्ति 55 गुणा बढ़ा दी ..
अमरीका की समृद्धि 55 गुणा बढ़ा दी ..
तो अमरीका को 55 गुणा ताकतवर कर दिया हमने और अपने को 55 गुणा कमजोर कर लिया हमारी सरकार ने ऐसी खतरनाक शर्तें की हैं की विश्व बैंक और मुद्रा कोष से की अगर हम 1952 में अगर अमरीका को समान बैचें तो उसकी कीमत 1डॉलर में ही देनी होती थी -
और आज हमें अमरीका को 55 रूपये का समान बेचना होता है तो हमारी आमदनी आज भी 1952 वाले 1 डॉलर के हिसाब से होती है ????
और सामान आज भी उतना ही जाता है जितना की 1952 में जाता था पर उसकी वाही 1 डॉलर है , माने हमारा निर्यात 5गुणा सस्ता हो गया है इसका माने 1952 में अमरीका से हमें अगर 1 डॉलर का सामान खरीदना होता था तो हमें 1 रूपये कीमत ही देनी पड़ती थी और आज 1 डॉलर के सामान की कीमत 55 रूपये देनी होती है ! मतलब के आयात हमारा 55 गुणा महँगा हो गया और निर्यात हमारा 55 गुणा सस्ता हो गया और आयात निर्यात दोनों एक समय पर करें तो सीधा- सीधा 110 रूपये का नुक्सान हो गया !
अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें और सुनें कैसे भारत अंतर्राष्ट्रीय संधियों के मकडजाल में फँसा, जकड़ा हुआ लुट रहा है :-http://98.130.113.92/Antarraashtriya_Sandhiyon_Mein_Phansa_Bharat.mp3
अंत में बस इतना ही की भारत को ये कांग्रेसी बेच रहे है , मन्द मोहन सिंह विश्व बैंक का 10 साल तक नौकर रह चुका है और उनकी नीतियों को लागू करवाने के लिए ही हम उसे अमेरिका का एजेंट बताते हैं (भारत का तथाकथित प्रधान मंत्री रोबोट भी कहा जाता है इस नकली सरदार को ) कांग्रेस के अधिकतर नेता देश को बेचने के लिए कांग्रेस में कार्यरत हैं... और अपना देशद्रोह करने का देश बेचने कर कार्य ये देशद्रोही कांग्रेसी बाखूबी निभा रहे हैं ...
कोई रूस की ख़ुफ़िया एजेंसी के.जी.बी का एजेंट है
कोई मोजार्ट का
कोई आई.एस.आई का
कोई सी.आई.ए का तो
कोई वर्ल्ड बैंक का एजेंट है ...
इसमें आई.एस.आई की बड़ी अहम् भूमिका है भारत के गद्दारों का जो काला धन हवाला के जरिये विदेशी टेक्स हेवन बैंक में जमा होता है उसका रूट आई.एस.आई से दुबई होते हुए टेक्स हेवन देशों में जमा होता है ... कहने का मतलब भारत के गद्दार नेताओं -मंत्रियों , अधिकारीयों , ब्युरोकेट्स, उद्योगपतियों . अभिनेताओं , कोर्प्रेट्स की सभी जानकारियाँ पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी आई.एस.आई के पास है ...
भारत में बढ़ रहे भ्रष्टाचार , महँगाई , मिलावात्खोरी , जमाखोरी ,बढ़ते अपराध , भूख,कुपोषण ,गरीबी आतंकवाद और देश की दुर्दशा के पीछे सबसे बड़ा कारण कांग्रेस ही है ...
इस समय भारत को एक नेतृत्व की आवश्यकता है ...नहीं तो ये कांग्रेसी देश बेच देंगें...
जागो भारतियों जागो ... देशद्रोहियों को पहचानों और भारत को आज़ाद कराने के लिए बलिदान हुए 7 लाख 32 हज़ार से ज्यादा क्रान्तिकारियों की हमारे लिए दी गयी कुर्बानियों का कर्ज चुकाने के लिए आगे आओ और हमारे क्रान्तिवीरों के सपनो का भारत बनाने का संकल्प लो ... वन्दे मातरम , भारत माता की जय ......
Indian rupee plummets to historic low against dollar
मित्रों दुखखबरी , 1 डॉलर की कीमत आज भारत के 55 रूपये 39 पैसे के बराबर हो गयी है ???????
वैसे भ्रष्ट कांग्रेस के राज में ये कोई बड़ी बात नहीं है , भारत के तथाकथित 65 साल की आज़ादी में ऐसा तो होना ही था , राजीव भाई बताते थे की ये सब भारत के अन्तर्राष्ट्रीय संधियों के मकडजाल में जकड़े हुए होने के कारण हो रहा है और अगर उन संधियों को ख़तम नहीं किया गया तो ऐसा ही होता रहेगा ...
27 दिसम्बर 1947 में भारत के कुछ गद्दारों काले अंग्रेजों ने गोरे अंग्रेजों के साथ संधियाँ की थी
1. विश्व बैंक की संधि
और
दूसरी 2. अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की संधि उस समय भारत को मिलाकर लगभग 44 देश इस संधि में अपना अंशदान देते थे और फँसे हुए थे
भारत की तथाकथित आज़ादी साल 1947 से 1952 तक भारत के रूपये की कीमत 1 डॉलर के समान थी 1 रूपये = 1 डॉलर थी
संधि कुछ इस प्रकार थी की भारत हर साल अपना अंशदान अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक में जमा कराएगा वो अंशदान 1 अरब डॉलर से 2 अरब डॉलर और 1 अरब का मतलब 100 करोड़ रूपये होता है , पर जब कभी कर्जे की जरुरत पड़ेगी तब दोनों हमारे ऊपर कुछ शर्तें लादते हैं उन शर्तों के तहत (पर) ही हमें कर्ज दिया जायेगा / जाता है ...
भारत अपना अंशदान हर साल जमा कराता आ रहा है और वो उनकी सम्पत्ति है न की भारत की ? भारत ने हर साल अपना अंशदान जमा कराया पहली बार 1947 में फिर 1948 में जमा कराया फिर 1949 में जमा कराया फिर 1950 में जमा कराया फिर 1951 में जमा कार्य फिर 1952 में ही जमा कराया और 1952 में ही हमारी सरकार को कर्जे की जरुरत पड़ गयी , उस समय हमारी सरकार ने पहली पंचवार्षिक योजना बनायीं जिसके लिए पूँजी की जरुरत पड़ गयी थी तो हमारी सरकार ने विश्व बैंक से कहा की हम 1947 से हर साल अपना अंशदान जमा करा रहे हैं , और अबतक हमारा आप के पास जमा अंशदान करीब 6 से 7 अरब डॉलर का हो चुका है !
लिहाजा हम इतना कर्ज लेने के अधिकारी हैं हमें कर्ज दिया जाये , तो विश्व बेंक ने कहा की हम कर्ज तो देंगें , लेकिन हमारी शर्तें मान लो आप तब हम आप को कर्ज देंगें तो वो कर्ज तो देते हैं पर शर्तें (Condition ) लगते हैं !
1952 में पहली बार अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने सबसे पहली शर्त लगायी की भारत अपने रूपये की कीमत गिराएगा , अवमूल्यन (Devaluation ) करेगा और 1952 से पहले की स्तिथि ये थी की भारत का 1 रुपया 1 डॉलर के बराबर था ! लेकिन विश्व बैंक के पास जब हम कर्ज माँगने गए तो उन्होंने शर्त रखी की अपने रूपये की कीमत गिराओ और उसने पहली ही बारी में भारत के रूपये की कीमत डॉलर के मुकाबले 30% गिरा दी फिर क्या हुआ 1957 में फिर हम विश्व बैंक और मुद्रा कोष के पास कर्ज माँगने के लिए क्योंकि दूसरी पंचवार्षिक योजना के लिए पैसे(रूपये) की कीमत गिराओ फिर 1962 में गए फिर 1967 में गए फिर 1972 में गए फिर 1977 में गए फिर 1982 में गए फिर 1987 में गए और 1991 में तो विश्व बैंक और मुद्रा कोष ने कह दिया की इतने %प्रतिशत कीमत गिराओगे तभी हम कर्ज देंगें , भारत सरकार ने विश्व बैंक और मुद्रा कोष के कहने पर इतनी कीमत गिराई रूपये की कीमत 1952 में 1 रूपये = 1 डॉलर से ले कर आज 2012 में 1 डॉलर की कीमत 55 .39 रूपये हो गई है !
और अब आप ही सोचिये सरकार ने विश्व बैंक और अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के षड्यंत्र में फँस कर अपने रूपये की कीमत 55 रूपये 39 पैसे अपनी करेंसी की कम करा ली ...
हमने 55 गुणा कीमत अपनी प्रोपर्टी की कम कर ली ...
हमने 55 गुणा कीमतें अपने संसाधनों की कम कर ली ...
हमने 55 गुणा अपनी इज्जत कम कर ली और अमरीका का डॉलर 55 गुणा ज्यादा कर दिया !
अमरीका की सम्पत्ति 55 गुणा बढ़ा दी ..
अमरीका की समृद्धि 55 गुणा बढ़ा दी ..
तो अमरीका को 55 गुणा ताकतवर कर दिया हमने और अपने को 55 गुणा कमजोर कर लिया हमारी सरकार ने ऐसी खतरनाक शर्तें की हैं की विश्व बैंक और मुद्रा कोष से की अगर हम 1952 में अगर अमरीका को समान बैचें तो उसकी कीमत 1डॉलर में ही देनी होती थी -
और आज हमें अमरीका को 55 रूपये का समान बेचना होता है तो हमारी आमदनी आज भी 1952 वाले 1 डॉलर के हिसाब से होती है ????
और सामान आज भी उतना ही जाता है जितना की 1952 में जाता था पर उसकी वाही 1 डॉलर है , माने हमारा निर्यात 5गुणा सस्ता हो गया है इसका माने 1952 में अमरीका से हमें अगर 1 डॉलर का सामान खरीदना होता था तो हमें 1 रूपये कीमत ही देनी पड़ती थी और आज 1 डॉलर के सामान की कीमत 55 रूपये देनी होती है ! मतलब के आयात हमारा 55 गुणा महँगा हो गया और निर्यात हमारा 55 गुणा सस्ता हो गया और आयात निर्यात दोनों एक समय पर करें तो सीधा- सीधा 110 रूपये का नुक्सान हो गया !
अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें और सुनें कैसे भारत अंतर्राष्ट्रीय संधियों के मकडजाल में फँसा, जकड़ा हुआ लुट रहा है :-http://98.130.113.92/Antarraashtriya_Sandhiyon_Mein_Phansa_Bharat.mp3
अंत में बस इतना ही की भारत को ये कांग्रेसी बेच रहे है , मन्द मोहन सिंह विश्व बैंक का 10 साल तक नौकर रह चुका है और उनकी नीतियों को लागू करवाने के लिए ही हम उसे अमेरिका का एजेंट बताते हैं (भारत का तथाकथित प्रधान मंत्री रोबोट भी कहा जाता है इस नकली सरदार को ) कांग्रेस के अधिकतर नेता देश को बेचने के लिए कांग्रेस में कार्यरत हैं... और अपना देशद्रोह करने का देश बेचने कर कार्य ये देशद्रोही कांग्रेसी बाखूबी निभा रहे हैं ...
कोई रूस की ख़ुफ़िया एजेंसी के.जी.बी का एजेंट है
कोई मोजार्ट का
कोई आई.एस.आई का
कोई सी.आई.ए का तो
कोई वर्ल्ड बैंक का एजेंट है ...
इसमें आई.एस.आई की बड़ी अहम् भूमिका है भारत के गद्दारों का जो काला धन हवाला के जरिये विदेशी टेक्स हेवन बैंक में जमा होता है उसका रूट आई.एस.आई से दुबई होते हुए टेक्स हेवन देशों में जमा होता है ... कहने का मतलब भारत के गद्दार नेताओं -मंत्रियों , अधिकारीयों , ब्युरोकेट्स, उद्योगपतियों . अभिनेताओं , कोर्प्रेट्स की सभी जानकारियाँ पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी आई.एस.आई के पास है ...
भारत में बढ़ रहे भ्रष्टाचार , महँगाई , मिलावात्खोरी , जमाखोरी ,बढ़ते अपराध , भूख,कुपोषण ,गरीबी आतंकवाद और देश की दुर्दशा के पीछे सबसे बड़ा कारण कांग्रेस ही है ...
इस समय भारत को एक नेतृत्व की आवश्यकता है ...नहीं तो ये कांग्रेसी देश बेच देंगें...
जागो भारतियों जागो ... देशद्रोहियों को पहचानों और भारत को आज़ाद कराने के लिए बलिदान हुए 7 लाख 32 हज़ार से ज्यादा क्रान्तिकारियों की हमारे लिए दी गयी कुर्बानियों का कर्ज चुकाने के लिए आगे आओ और हमारे क्रान्तिवीरों के सपनो का भारत बनाने का संकल्प लो ... वन्दे मातरम , भारत माता की जय ......
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