Opposed to killing Cow and animals in the Vedas
वेदों में पशुओं की हत्या का विरोध तो है ही बल्कि गौ- हत्या पर तो तीव्र आपत्ति करते हुए उसे निषिद्ध माना गया है | यजुर्वेद में गाय को जीवनदायी पोषण दाता मानते हुए गौ हत्या को वर्जित किया गया है |
घृतं दुहानामदितिं जनायाग्ने मा हिंसी: - यजुर्वेद १३।४९
आरे गोहा नृहा वधो वो अस्तु - ऋग्वेद ७ ।५६।१७
सदा ही रक्षा के पात्र गाय और बैल को मत मार |
ऋग्वेद गौ- हत्या को जघन्य अपराध घोषित करते हुए मनुष्य हत्या के तुल्य मानता है और ऐसा महापाप करने वाले के लिये दण्ड का विधान करता है |
सूयवसाद भगवती हि भूया अथो वयं भगवन्तः स्याम
अद्धि तर्णमघ्न्ये विश्वदानीं पिब शुद्धमुदकमाचरन्ती - ऋग्वेद १।१६४।४०
अघ्न्या गौ- जो किसी भी अवस्था में नहीं मारने योग्य हैं, हरी घास और शुद्ध जल के सेवन से स्वस्थ रहें जिससे कि हम उत्तम सद् गुण,ज्ञान और ऐश्वर्य से युक्त हों |वैदिक कोष निघण्टु में गौ या गाय के पर्यायवाची शब्दों में अघ्न्या, अहि- और अदिति का भी समावेश है | निघण्टु के भाष्यकार यास्क इनकी व्याख्या में कहते हैं -अघ्न्या – जिसे कभी न मारना चाहिए | अहि – जिसका कदापि वध नहीं होना चाहिए | अदिति – जिसके खंड नहीं करने चाहिए | इन तीन शब्दों से यह भलीभांति विदित होता है कि गाय को किसी भी प्रकार से पीड़ित नहीं करना चाहिए | प्राय: वेदों में गाय इन्हीं नामों से पुकारी गई है |
घृतं दुहानामदितिं जनायाग्ने मा हिंसी: - यजुर्वेद १३।४९
आरे गोहा नृहा वधो वो अस्तु - ऋग्वेद ७ ।५६।१७
सदा ही रक्षा के पात्र गाय और बैल को मत मार |
ऋग्वेद गौ- हत्या को जघन्य अपराध घोषित करते हुए मनुष्य हत्या के तुल्य मानता है और ऐसा महापाप करने वाले के लिये दण्ड का विधान करता है |
सूयवसाद भगवती हि भूया अथो वयं भगवन्तः स्याम
अद्धि तर्णमघ्न्ये विश्वदानीं पिब शुद्धमुदकमाचरन्ती - ऋग्वेद १।१६४।४०
अघ्न्या गौ- जो किसी भी अवस्था में नहीं मारने योग्य हैं, हरी घास और शुद्ध जल के सेवन से स्वस्थ रहें जिससे कि हम उत्तम सद् गुण,ज्ञान और ऐश्वर्य से युक्त हों |वैदिक कोष निघण्टु में गौ या गाय के पर्यायवाची शब्दों में अघ्न्या, अहि- और अदिति का भी समावेश है | निघण्टु के भाष्यकार यास्क इनकी व्याख्या में कहते हैं -अघ्न्या – जिसे कभी न मारना चाहिए | अहि – जिसका कदापि वध नहीं होना चाहिए | अदिति – जिसके खंड नहीं करने चाहिए | इन तीन शब्दों से यह भलीभांति विदित होता है कि गाय को किसी भी प्रकार से पीड़ित नहीं करना चाहिए | प्राय: वेदों में गाय इन्हीं नामों से पुकारी गई है |
Gritn Duhanamditin Jnaiagne Hinsi Ma: - Yajurveda 13.49
Used as Amen Goha Nriha Vdo - Rigveda 7 .56.17
Cows and bulls do not always protect the character to kill |
Rigveda cows - killing the man declared heinous crime like murder and it acknowledges the enormity of the punishment for that legislation |
Bhagwati Suyvsad H Bhuya Atho own Bgvntः Siam
Addhi Tarnmgnye Biswdanin शुद्धमुदकमाचरन्ती Pib - Rigveda 1.164.40
A person - and also includes Aditi | Nigntu Yask their interpretation of the commentator says - Agnya - which never should have killed | A person - which should never be slaughtered | Aditi - the section should not | three words that clearly is known that the cow should not suffer from any kind of | often the same names described in the Vedas is a cow |
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