Mullon the evolution theory of evolution
मैनें मुल्लों की उत्पत्ति पर एक सोध पत्र लिखी है, प्रस्तुत है उसके कुछ मुख्य अंश :
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मुल्लों की उत्पत्ति (विकासवाद के सिधांत से)
माँ भारती और सनातन धर्म (अब हिंदू) की इतिहास काफ़ी पुरानी है| पृथ्वी पर हम सनातनी, मानव सभ्यता के विकास से हैं, इसके प्रमाण मौजूद हैं|
हमारे सनातन संस्कारों, परंपराओं, संस्कृति का कोई जोड़ नही| प्राचीन काल में कुछ राक्षसी प्रवृति के जीवों को उनके असामाजिक कुकृतियों हेतु दंड स्वरूप देश निकाला/मृत्यु दंड दिया गया था, जो सपरिवार, मध्य पूर्व एशिया (अब अरब) के वीरान रेगिस्तान में जा छुपे| चुकी वहाँ मानव सभ्यता का कोई नामोनिशान नही था, इन्होनें अपनें परिवार की मदाओ से हीं अपनी संख्या बढ़ाना शुरू कर दिया
चुकी ये सनातन परंपराओं के विरोधी थे, अतः इन जीवों नें एक उल्टी परिपार्टी शुरू कर दिया, अर्थात उल्टा लिखना, उल्टी दिशा को शुभ मान कर पूजना, इत्यादि| सनातनी बहुत हीं पवित्रता से जीवन यापन करते थे/हैं इसी के विरोध स्वरूप इन निकृष्ट जीवों नें अमानवीया जीवन प्रणाली को अपना लिया, जैसे मुँह नही धोना, जानवरों जैसे रहना-सहन, किसी जीवों के माँस का सेवन इत्यादि|
इन्होनें अपनी नस्लों को सनातन एवम् कुलीन वर्ग विरोधी बनाया, जो आज तक चली आ रही है| (यदि आज के परिपेक्ष में कहें तो इन्होनें अपने नस्ल को आतंकी बनाया|) इन्हीं में से किसी तथाकथित मुहम्मद नें एक ऐसी पुस्तक लिखी जिसमें सिर्फ़ आतंक को बढ़ावा देने वाली बातें है, जिसे क़ुरान कहा गया|
विकास के दौर में इसी क़ुरान को मान कर इन्होने सभी सनातन परंपराओं के उल्ट परंपराएँ शुरू किया, जैसे परिवार में शादी, अनगिनत बच्चे, गो हत्या इत्यादि|
आदिकाल से हीं ये सनातन विरोधी थे अतः सनातन संस्कृति को ख़त्म करने हेतु भारत पर अनेकों आक्रमण किए गये, कुछ कमजोर सानातनियों पर अत्याचार, बलात्कार इत्यादि किए गये, इसके दूरगामी परिणाम हुए, इनकी राक्षसी नस्लें भारत में भी पैदा हुई, जो आज भी सनातन के धुर विरोधी है|
इन्हीं जीवों को मुल्ला कहा जाता है !!!
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मुल्लों की उत्पत्ति (विकासवाद के सिधांत से)
माँ भारती और सनातन धर्म (अब हिंदू) की इतिहास काफ़ी पुरानी है| पृथ्वी पर हम सनातनी, मानव सभ्यता के विकास से हैं, इसके प्रमाण मौजूद हैं|
हमारे सनातन संस्कारों, परंपराओं, संस्कृति का कोई जोड़ नही| प्राचीन काल में कुछ राक्षसी प्रवृति के जीवों को उनके असामाजिक कुकृतियों हेतु दंड स्वरूप देश निकाला/मृत्यु दंड दिया गया था, जो सपरिवार, मध्य पूर्व एशिया (अब अरब) के वीरान रेगिस्तान में जा छुपे| चुकी वहाँ मानव सभ्यता का कोई नामोनिशान नही था, इन्होनें अपनें परिवार की मदाओ से हीं अपनी संख्या बढ़ाना शुरू कर दिया
चुकी ये सनातन परंपराओं के विरोधी थे, अतः इन जीवों नें एक उल्टी परिपार्टी शुरू कर दिया, अर्थात उल्टा लिखना, उल्टी दिशा को शुभ मान कर पूजना, इत्यादि| सनातनी बहुत हीं पवित्रता से जीवन यापन करते थे/हैं इसी के विरोध स्वरूप इन निकृष्ट जीवों नें अमानवीया जीवन प्रणाली को अपना लिया, जैसे मुँह नही धोना, जानवरों जैसे रहना-सहन, किसी जीवों के माँस का सेवन इत्यादि|
इन्होनें अपनी नस्लों को सनातन एवम् कुलीन वर्ग विरोधी बनाया, जो आज तक चली आ रही है| (यदि आज के परिपेक्ष में कहें तो इन्होनें अपने नस्ल को आतंकी बनाया|) इन्हीं में से किसी तथाकथित मुहम्मद नें एक ऐसी पुस्तक लिखी जिसमें सिर्फ़ आतंक को बढ़ावा देने वाली बातें है, जिसे क़ुरान कहा गया|
विकास के दौर में इसी क़ुरान को मान कर इन्होने सभी सनातन परंपराओं के उल्ट परंपराएँ शुरू किया, जैसे परिवार में शादी, अनगिनत बच्चे, गो हत्या इत्यादि|
आदिकाल से हीं ये सनातन विरोधी थे अतः सनातन संस्कृति को ख़त्म करने हेतु भारत पर अनेकों आक्रमण किए गये, कुछ कमजोर सानातनियों पर अत्याचार, बलात्कार इत्यादि किए गये, इसके दूरगामी परिणाम हुए, इनकी राक्षसी नस्लें भारत में भी पैदा हुई, जो आज भी सनातन के धुर विरोधी है|
इन्हीं जीवों को मुल्ला कहा जाता है !!!
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