जम्मू काश्मीर को भारत से विभाजित करने का सरकारी षडयँत्र !!
जम्मू काश्मीर को भारत से विभाजित करने का सरकारी षडयँत्र !!
कल जम्मू काश्मीर पर केँद्र सरकार द्वार नियुक्त वार्ताकारो दिलीप पडगाँवकर, राधा कुमार और एम एस अँसारी रिपोर्ट की रिपोर्ट गृहमँत्रालय ने सार्वजनिक कर दी है ,इस रिपोर्ट के माध्यम से काश्मीर को भारत से अलग करने का षडयँत्र रचा जा रहा है |
आपको बता दूँ कि उक्त तीनो वार्ताकार वामपँथी, सेकुलर और देशविरोधी किस्म के है और समय समय पर एनजीओ और अन्य माध्यमो से सेना के खिलाफ प्रदर्शनो मे शामिल रहे है ,इन्होने अपनी रिपोर्ट मे जो सिफारिशे की है वे देशद्रोह के अलावा कुछ नही है |
इनकी मुख्य सिफारिशे है ----
* J&K से सेना को हटाया जाये ,सेना को दी ग्ई जमीने वापस ली जाये !
* J&K मे भारत सरकार द्वारा लागू सभी कानून हटाये जाये व 1952 से पहले की स्थिति लागू की जाये !
* धारा 370 से 'अस्थायी' शब्द हटाकर उसे स्थायी किया जाये !
* देश की सँसद का कोई भी कानून राज्य सरकार की अनुमति के बिना J&K पर लागू ना करे !
* राज्य की जनता को निर्बाध रुप से सीमापार 'आवाजाही व व्यापार' करने दिया जाये !
* कश्मीरी युवको और सभी राजनैतिक बँदियो पर से सभी मुकदमे हटाये जाये और उन्हे रिहा करे और साथ ही सेना के जवानो पर मानवाधिकारो के उल्लघँन का मुकदमा चलाया जाये ।
अचरज की बात तो ये है कि गृहमँत्री ने इस रिपोर्ट को कुडेदान मे फेँकने की बजाय अमल की कोशिशे शुरु कर दी है। होना तो ये चाहिये था कि सरकार तीनो वार्ताकारो पर ऐसी रिपोर्ट तैयार करने के लिये देशद्रोह का मुकदमा दर्ज करती लेकिन हद होती है तुष्टीकरण की !!**
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कल जम्मू काश्मीर पर केँद्र सरकार द्वार नियुक्त वार्ताकारो दिलीप पडगाँवकर, राधा कुमार और एम एस अँसारी रिपोर्ट की रिपोर्ट गृहमँत्रालय ने सार्वजनिक कर दी है ,इस रिपोर्ट के माध्यम से काश्मीर को भारत से अलग करने का षडयँत्र रचा जा रहा है |
आपको बता दूँ कि उक्त तीनो वार्ताकार वामपँथी, सेकुलर और देशविरोधी किस्म के है और समय समय पर एनजीओ और अन्य माध्यमो से सेना के खिलाफ प्रदर्शनो मे शामिल रहे है ,इन्होने अपनी रिपोर्ट मे जो सिफारिशे की है वे देशद्रोह के अलावा कुछ नही है |
इनकी मुख्य सिफारिशे है ----
* J&K से सेना को हटाया जाये ,सेना को दी ग्ई जमीने वापस ली जाये !
* J&K मे भारत सरकार द्वारा लागू सभी कानून हटाये जाये व 1952 से पहले की स्थिति लागू की जाये !
* धारा 370 से 'अस्थायी' शब्द हटाकर उसे स्थायी किया जाये !
* देश की सँसद का कोई भी कानून राज्य सरकार की अनुमति के बिना J&K पर लागू ना करे !
* राज्य की जनता को निर्बाध रुप से सीमापार 'आवाजाही व व्यापार' करने दिया जाये !
* कश्मीरी युवको और सभी राजनैतिक बँदियो पर से सभी मुकदमे हटाये जाये और उन्हे रिहा करे और साथ ही सेना के जवानो पर मानवाधिकारो के उल्लघँन का मुकदमा चलाया जाये ।
अचरज की बात तो ये है कि गृहमँत्री ने इस रिपोर्ट को कुडेदान मे फेँकने की बजाय अमल की कोशिशे शुरु कर दी है। होना तो ये चाहिये था कि सरकार तीनो वार्ताकारो पर ऐसी रिपोर्ट तैयार करने के लिये देशद्रोह का मुकदमा दर्ज करती लेकिन हद होती है तुष्टीकरण की !!**
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